कल तुम मेरा नाम पढ़ोगे इतिहासों के शिलालेख पर
जिनके पैरों में छाले हैं मै उनकी आँखों का जल हूँ ।
मै पीड़ाओं का गायक हूँ
शब्दों का व्यापार नहीं हूँ
जहाँ सभी चीजें बिकती हैं
मै ऐसा बाज़ार नहीं हूँ
मुझ पर प्रश्न चिन्ह मत थोपो कुंठित व्याकरणी पैमानो
मुझको रामकथा-सा पढ़िये बहुत सहज हूँ, बहुत सरल हूँ।
दरबारों की मेहरबानियाँ
जड़ भी चतुर-सुजान हो गए
जुगनू विरुदावलियाँ गाकर
साहित्यिक दिनमान हो गए
मै डरकर अभिनन्दन गाऊँ, इससे से अच्छा है मर जाऊं
मै सागर का क़र्ज़ चुकाने वाला आवारा बादल हूँ ।
मैंने पगडण्डी नापी है
आपने पैरों हौले-हौले
मेरे दर से खाली लौटे
राजनीति के उड़नखटोले
राजभवन के कालीनों पर मेरे ठोकर चिन्ह मिलेंगे
मै आँसू का ताजमहल हूँ झोपड़ियों का राजमहल हूँ।
मेरा मोल लगाने बैठे
हैं कुछ लोग तिजोरी खोले
दुनिया में इतना धन कब है
जो मेरी खुद्दारी तोले।
जब से मुझको नील-कंठनी कलम विधाता ने सौंपी है
तन में चित्रकूट-वृन्दावन, मन में गंगा की कलकल हूँ।
-डॉ. हरिओम पंवार
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