दिव्य शिवलिंग है हमारा अपना अंगूठा ..........
जब हम अपनी चार उंगलिओं को मोड़ कर अंगूठा ऊपर करते हैं तब हमारा अंगूठा एक शिव लिंग का आकार ले लेता है . यही है हमारे शरीर में हमारा साथ सदा रहने वाला शिव लिंग. यदि आपको कहीं मंदिर में कोई शिव लिंग उपलब्ध नही हो पाता है तो आप अपने अंगूठे पर ही जलाभिषेक करके भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं .
अंगूठे का नाखून शिव लिंग के साथ में चन्द्र का प्रतीक है। अंगूठे पर बनी तीन मोटी रेखाएं प्राकृतिक रूप से इस शिवलिंग को तिलक करती हैं. नाखून के पीछे की रेखाएं (जिनका प्रयोग फिंगर प्रिंट के लिए होता है ) वो भगवान शिव की जटाएं हैं . हर व्यक्ति के अंगूठे रूपी शिव लिंग में ये जटाएं एक अलग तरह की होती हैं. बिना अंगूठे के प्रयोग के आप केवल अपनी बाक़ी चार उँगलियों से कोई बड़ा कार्य जैसे भार उठाना, लिखना आदि नही कर सकते क्योंकि आप बिना शिवजी की सहायता के कुछ नही कर सकते.
अंगूठे से तिलक करने से आपको भगवान शिव का आशीर्वाद स्वतः मिल जाता है .
शिवलिंग मुद्रा.........
बाएं हाथ को पेट के पास लाकर सीधा रखें। दाएं हाथ की मुठ्ठी बना कर बाईं हथेली पर रखें और दाएं हाथ का अंगूठा सीधा ऊपर की ओर रखें। नीचे वाले बाएं हाथ की अंगुलियाँ और अंगूठा मिला कर रखें। दोनों बाजुओं की कोहनियाँ सीधी रखें। इस मुद्रा को शिवलिंग मुद्रा कहते हैं।
शिवलिंग मुद्रा दिन में दो बार पाँच मिनट के लिए लगाएं।
लाभ .............
शिवलिंग मुद्रा लगाने से सुस्ती, थकावट दूर हो नयी शक्ति का विकास होता है।
शिवलिंग मुद्रा लगाते हुए लम्बे व गहरे सांस लेने चाहिये।
शिवलिंग मुद्रा लगाने से मानसिक थकान व चिंता दूर होती है।
हाथ की उंगलियों में पंच तत्व का वास.........
हमारे हाथ की उंगलियों में पंच तत्व का वास है। हमारे अंगुष्ठ में आकाश, तर्जनी में वायु, मध्यमा में अग्नि, अनामिका में जल एवं कनिष्ठा में पृथ्वी तत्व स्थित है।भोजन हाथ से ही करें, कटलरी से नहीं.....
हमारी उंगलियों को ऋषि स्वरूप एवं हमारे भोजन को देवी स्वरूप माना जाता है। जब हम भोजन हाथ से करते हैं, तो ऋषि हमारे भोजन को मुंह तक ले जाते हैं, जिससे हम जीवित रहते हैं। अतः भोजन साफ-सुथरे हाथ से ही करें, कटलरी से नहीं। भोजन को प्रसाद रूप में ग्रहण करेंगे तो उसका अच्छा असर हमारे शरीर, मन और बुद्धि तक होगा ।
कटलरी अर्थात चाकू, छूरी, कांटे से भोजन को काटना, फाड़ना एवं छेदना क्या असभ्यता की निशानी नहीं है ?
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